पेप्सी-कोक से कीटों को मार रहे बनारस के किसान

पेप्सी-कोक से कीटों को मार रहे बनारस के किसान

 

पेप्सी-कोक महंगे कीटनाशकों से न सिर्फ सस्ते हैं, बल्कि हार्मफुल भी नहीं

विजय विनीत 

 दुनिया भर में पेप्सी और कोक जैसे कोल्ड ड्रिंक का इस्तेमाल पीने के लिए हो रहा है, लेकिन बनारस के किसान इसका प्रयोग कीटनाशक के रूप में कर रहे हैं। किसान इसका प्रयोग सब्जियों पर कर रहे हैं और फूलों पर भी। कुछ गेहूं और सरसों की फसलों पर भी इसका घोल छिड़क रहे हैं। कीटनाशक के रूप में प्रयोग करने में पेप्सी-कोक सस्ते हैं। इसलिए ये शीतल पेय किसानों की पसंद बनता जा रहा है। बनारस के चोलापुर, चिरईगांव, अराजीलाइन इलाके के किसान पेप्सी-कोक का इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं। किसानों का मानना है कि पेप्सी-कोक महंगे कीटनाशकों से न सिर्फ सस्ते हैं, बल्कि हार्मफुल भी नहीं हैं। उधर कृषि विज्ञानियों का मानना है कि यह पुराने जमाने की ट्रिक है। पहले कीटनाशकों के रूप में खाड़ (गुड़) का इस्तेमाल किया जाता था। कोक और पेप्सी की मिठास से ट्राइकोडर्मा और बबेरिया वैसियाना जैसे मित्र फफूंद न सिर्फ उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि कीटों का सफाया भी करते हैं। हालांकि पेप्सी और कोक बनाने वाली कंपनियां दावा करती हैं कि दोनों शीतल पेयों में ऐसा कोई पदार्थ नहीं है जो कीटों का सफाया करने में सक्षम हों।

चौबेपुर इलाके के बबियांव के प्रगतिशील किसान शैलेंद्र सिंह और परानापट्टी के फौजदार यादव दावा करते हैं कि उन्होंने सब्जी और फूलों पर पेप्सी और कोक का घोल छिड़का तो अभूतपूर्व नतीजा सामने आया। कीटनाशकों की तरह ही शीतल पेयों से शत्रु कीट मर गए। आक्सिीन और जिबरलिन जैसे प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर (हार्मोन) को घोलने के लिए अब उन्हें अल्कोहल और शराब ढूंढना नहीं पड़ता। ये हार्मोन पेप्सी और कोक में आसानी से घुल जाते हैं। कीटनाशकों से दस गुने सस्ते ये शीतल पेय किसानों को चाय-पान की दुकानों पर भी आसानी से मिल जाते हैं। इसके चलते किसानों में इसकी लोकप्रियता में भारी इजाफा हो रहा है। किसानों के मुताबिक पेप्सी अथवा कोक की दो लीटर की बोतल से 300 लीटर पानी में घोल बनाकर सवा बीघे फसल में छिड़का जा सकता है। इसकी कीमत महज 50-55 रुपये बैठती है, जबकि मोनोक्रोटोफाश अथवा रोगार जैसे कीटनाशक इस्तेमाल करने पर किसानों को 400से 450 रुपये खर्च करना पड़ता है।’ अराजालाइन क्षेत्र के प्रगतिशील किसान शिवशंकर कहते हैं,  ‘सरसों पर माहो का हमला हुआ तो पेप्सी-कोक के स्प्रे से फसल बच गई। वाराणसी जिले के किसानों ने इसी साल से पेप्सी-कोक का कीटनाशकों के रूप में इस्तेमाल शुरू किया है। यह सेहत के लिए सुरक्षित और बेहद सस्ते हैं।’

वाराणसी के उद्यान निरीक्षक ज्योति कुमार सिंह कहते हैं, ‘पेप्सी-कोक में हाई फ्रक्टोज कार्न सिरप और एक्सपार्टेन होता है। ये पदार्थ शीतल पेय को मीठा बनाते हैं। इनका छिड़काव करने से दो फायदे होते हैं। पहला पौधों को सीधे शुगर मिलती है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है, जिससे फसलों का विकास तेजी से होने लगता है। दूसरा-मीठेपन के चलते चीटियां पौधों पर चढ़कर कीटों और लारवा को चट कर जाती हैं। माहो, तना छेदक, लारवा जैसे कीटों का सफाया करने में इन चीटियों को देर ही नहीं लगता है। पेप्सी और कोक में 0.5 फीसदी अल्कोहल होता है। इसके चलते ये प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर (पीजीआर) को घोलने में मदद करते हैं। जिबरेलिक एसिड जैसे हार्मोन सिर्फ अल्कोहल में ही घुलते हैं। यही वजह है पेप्सी और कोक में ये हार्मोन आसानी से घुल जाते हैं।’

उद्यान विभाग के उप निदेशक अनिल सिंह कहते हैं कि फसलों में उकठा रोग में बेहद कारगर माना जाने वाला ट्राइकोडर्मा जैसे मित्र फंगस को अगर किसी मीठे तत्व में घोलकर इस्तेमाल किया जाए तो उसकी कार्यक्षमता बढ़ जाती है। पेप्सी और कोक के मीठेपन से मित्र फफूंदों को भोजन मिलता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ जाती है। श्री सिंह ने यह भी बताया कि पहले छत्तीसगढ़ के दुर्ग, राजनांदगांव समेत कई जिलों के किसान धान की फसल पर पेप्सी-कोक का छिड़काव कीटनाशक के रूप में करते थे। उसी के तर्ज पर बनारस के किसानों ने गोभी, पत्ता गोभी, बैगन, करेला, पालक, मिर्च आदि फसलों में इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया है।

वाराणसी में शााक-भाजी और फूलों पर शराब का छिड़काव नई बात नहीं है, लेकिन अब पेप्सी-कोक की तूती बोलने लगी है। सस्ता होने के कारण किसान धड़ल्ले से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। किसानोँ के मुताबिक कोक अथवा पेप्सी का घोल गेंदे पर छिड़कने पर उसकी चमक और ग्रोथ दोनों ही बढ़ गई। यह बात दीगर है कि अभी पेप्सी-कोक के फसलों पर असर के बारे में कोई शोध नहीं हुआ है। एक डीलर ने बताया कि हाल के दिनों में ग्रामीण इलाकों में शीतल पेय की बिक्री में काफी इजाफा हुअ है।

वाराणसी के यूपी कालेज के कीटरोग विशेषज्ञ डा.कुलदीप सिंह किसानों के दावों पर इत्तेफाक नहीं रखते। इनका कहना है कि जिस तरह से किसान लौकी को बढ़ाने के लिए आक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाते है, उसी तरह का भ्रम पेप्सी और कोक को लेकर भी है। इस मामले को समझने के लिए प्रयोग की जरूरत है। अगर शीतल पेयों से कीट मरने लगें तो शीतल पेय बनाने वाली कंपनियां मालामाल हो सकती हैं। दुनिया की तमाम कंपनियां मालामाल हो सकती थीं। इस सिलसिले में पेप्सी के क्षेत्रीय विक्रय अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

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